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बचपन और शिक्षा : आचार्य पंडित विमल पारीक बोरावड मकराना का जन्म 27 जुलाई 1992 में राजस्थान के नागौर जिले के मकराना के बोरावड कस्बे में एक गरीब ब्राह्मण परिवार में हुआ. इनके परिवार में माता पिता के अलावा एक बहन भी है जिनका नाम मोनिका पारीक है. आचार्य पंडित विमल पालिका राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बोरावड इसके साथ संस्कृत वेदा अध्ययन के लिए महेश वेद अध्ययन केंद्र (ब्रह्मा सावित्री वेद विद्यापीठ पुष्कर) पठन-पाठन हुआ, उच्च स्तरीय उच्चतर विद्या के लिए जगत गुरु रामानंद संस्कृत विश्वविद्यालय मदाऊ जयपुर में , पढ़ाई संपन्न पूरी कि विद्या विश्वविद्यालय के विद्या अध्ययन के दौरान वेद विभाग के छात्र संघ विभागाध्यक्ष का कार्यभार भी संभाला इसी के साथ साथ अपने क्षेत्र में रोटरी इंटरनेशनल क्लब मकराना के कोषाध्यक्ष पद एवं आचार्य पारीक मकराना नगर परिषद के ब्रांड एंबेसडर तथा विश्व हिंदू परिषद मकराना तहसील अध्यक्ष इसके पश्चात नागौर जिला विश्व हिंदू परिषद जिला धर्मा अध्यक्ष तथा अखिल भारतीय हिंदू महासभा में प्रदेश संगठन मंत्री एवं सामाजिक क्षेत्र सर्व ब्राह्मण महासभा नई दिल्ली (पंजीकृत) के राष्ट्रीय प्रवक्ता के, तौर पर पर सफलतम दायित्व प्रभार वहन किया उनके माता पिता को उनका टूर्नामेंट मैं अंताक्षरी खेलना एवं लेखन कार्य सामाजिक कार्य (सोशल वर्क) पसंद नहीं था, इसके लिए कभी-कभी बचपन में उन्हें मार भी पड़ती थी. लेकिन जब इस सब के माध्यम से उन्हें एक देखते देखते ही कुछ ही समय के अंतर्गत छोटी सी अल्पायु में आचार्य पंडित विमल पारीक बोरावड मकराना का वर्चस्व जिले से राज्य स्तर तक राज्य स्तर से देश में और विदेश में वर्चस्व का कारवां बढ़ता गया तथा पंडित विमल पारीक के प्रशंसक देश के हर शहर में आज देखने को नजर आ रहे हैं प्राप्त हुई तब सभी बहुत खुश हुए और सबने उनका समर्थन किया.

शिक्षा का सामाजिक उपयोग : शिक्षा का समाज उपयोग आचार्य पंडित विमल पारीक बोरावड मकराना जिला नागौर राजस्थान का आचार्य पंडित विमल पारीक बोरावड मकराना नागौर जिले के छोटे – छोटे गांव बड़े – बड़े महा विशाल महायज्ञ का आचार्य पद पर शोभायमान होकर सफलतम मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा विभिन्न सामाजिक क्षेत्र 6 गांव बडू, परबतसर, बिदियाद, कालवा, बोरावड, मकराना माली समाज सामूहिक विवाह का कार्य आचार्य पद पर तथा रावणा राजपूत समाज का सामूहिक विवाह, मेघवाल समाज का सामूहिक विवाह जिससे आचार्य पंडित विमल पारीक को छोटी सी कम उम्र में बड़े-बड़े कार्य सफलतम आश्चर्यजनक संपन्न कराने पर लोगों ने प्यार से इन्हें याग्निक सम्राट, बाल पंडित की उपाधि से संबोधन उन्हें सब कहने लगे!
विश्व भर में मकराना की चमक और धमक में वर्ल्ड हेरिटेज सिटी अपना नाम दर्ज से पहले आचार्य पंडित विमल पारीक बोर्ड मकराना द्वारा राजस्थान मकराना की धरती पर एशिया का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय ज्योतिष महासम्मेलन आयोजित करवा कर वर्ल्ड ग्लोबल बुक रिकॉर्ड मैं अपनी संस्था एवं मकराना का नाम दर्ज करवाया उक्त कार्यक्रम में विश्व विभिन्न, परा खगोल शास्त्र वैदिक शास्त्र अर्थशास्त्री वास्तु शास्त्री भूगर्भ शास्त्री विद्याओं के विद्वान देश विदेशियों ने बढ़चढ़ कर भाग लिया राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रशासन सचिवालय के मुख्य सचिव कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पद पर शोभायमान रहे! आचार्य पंडित विमल पारीक का मुख्य उद्देश्य उठो जागो संघर्ष करो आध्यात्मिकता को आधुनिकता की ओर ले कर चलो आचार्य पारीक के आदर्श स्वामी विवेकानंद जी को मानते हैं!

आचार्य पंडित विमल पारीक
माँ कामाख्या ज्योतिष एवं वैदिक शोध संस्थान, मकराना के निदेशक हैं। उनकी संस्था के तत्वावधान में मकराना (राजस्थान) में दुनिया का सबसे बड़ा और लोकप्रिय इंटरनेशनल ज्योतिष एवं वैदिक वेदांग महोत्सव के नाम से तीन दिवसीय सेमिनार का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें हजारों की संख्या में लोगों ने भाग लिया।

आचार्य पंडित विमल पारीक धार्मिक, सामाजिक सेवा एवं परोपकार के अनेक कार्यों में निरंतर सक्रिय रहते हैं। वे बोरावड़–मकराना सर्व ब्राह्मण महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं राज्य प्रभारी के रूप में भी अपनी सेवाएँ दे रहे हैं। आप एक प्रतिष्ठित राजज्योतिषी एवं राजपंडित हैं तथा कछवाहा, शेखावत एवं खींची चौहान (जायल) वंश के राजगुरु एवं कुलपुरोहित रहे हैं। साथ ही, आप बंशीवाला मंदिर जायल नागौर  के मुख्य पुरोहित एवं पुजारी भी हैं।

अल्प आयु में ही देश के सर्वाधिक बड़े बड़े महायज्ञों एवं सामूहिक विवाह सम्मेलनों के सफल आयोजन हेतु आपको “याज्ञिक सम्राट” की उपाधि से सम्मानित किया गया। यह सम्मान जोधपुर में आयोजित सेमिनार में हिज हाइनेस हेमलता राजे जी, राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश श्री मनोज कुमार गर्ग, राजस्थान राज्य मंत्री श्रीमती संगीता बेनीवाल जी की गरिमामयी उपस्थिति में एस. के. जोशी जी एवं वरिष्ठ पत्रकार राजीव गौड़ द्वारा प्रदान किया गया।

इससे पूर्व राजस्थान के तत्कालीन राज्यपाल, माननीय महामहिम श्री कलराज मिश्र जी द्वारा अपने कर-कमलों से आदि शंकराचार्य का स्मृति-चिन्ह आशीर्वाद स्वरूप पंडित विमल पारीक को राजभवन जयपुर में भेंट किया गया।

पंडित विमल पारीक की लोकप्रियता अत्यंत व्यापक है और देश के कोने-कोने में उनके अनुयायी एवं श्रद्धालु देखने को मिल जाते हैं।

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